Gaslighting क्या होता है, क्या आप भी हो रहे हैं gaslighting का शिकार?

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क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि किसी ने आपको दफ्तर में, घर में या किसी जगह इस तरह की बातें कही हो की आप एक काम भी ढंग से नहीं कर सकतें, आपको तो याद ही नहीं रहता, हालांकि आपको पूरा विश्वास है कि आप काम अच्छे से कर रहे हैं और आपको चीजें याद भी है लेकिन फिर भी आपको खुद पर शक होने लगता है कि कहीं हम कुछ भूल तो नहीं रहे या फिर गलत तो नहीं कर रहे हैं और आपका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है एवं सामने वाला आप पर हावी होते जाता है। अगर ऐसा हो रहा है तो कहीं आप गैसलाइटिंग का शिकार तो नही हो रहे हैं और धीरे-धीरे इसका प्रभाव बढ़ता जाता है एवं आपको खुद के बारे में समझना मुश्किल होता जाता है पर आपका कॉन्फिडेंस डाउन होते चला जाता है। आज के ब्लॉग मे हम यह जानेंगे कि गैसलाइटिंग से जुड़े टर्म क्या है और कैसे दूसरों द्वारा लगाया गया हम पर झूठा आरोप हमारे हमारे कॉन्फिडेंस को खोखला कर रहा है एवं हम खुद को समझने में गलती कर रहे हैं।

कैसे चलन में आया गैसलाइटिंग शब्द

“Gaslighting” शब्द पैट्रिक हैमिल्टन द्वारा 1938 में खेला गया एक नाटक ‘गैसलाइट’  शीर्षक से आया है। गैसलाइट नाटक के आधार पर 1940 में गैसलाइट फिल्म रिलीज हुई जिसमें दिखाया गया है कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी को यह विश्वास दिलाने का प्रयास कर रहा है कि वह पागल हो रही है। इसके बाद गैसलाइटिंग शब्द चलन में आया और आम बोलचाल की भाषा में प्रयोग होने लगा।

गैसलाइटिंग का क्या मतलब होता हैं।

आइये समझते है gaslighting meaning in Hindi, गैसलाइटिंग का अर्थ होता है, मनोवैज्ञानिक तरीके से किसी के दिमाग के साथ इस तरह खेलना कि वह खुद के विवेक या तर्क करने की शक्तियों पर ही सवाल उठाने लग जाए। एक व्यक्ति अपने निजी फायदे के लिए दूसरे व्यक्ति को बार-बार मैनिपुलेट करता है तो दूसरे व्यक्ति के अंदर अनिश्चितता, आत्मविश्वास की कमी देखी जाती है। यह किसी व्यक्ति या समूह के द्वारा भी किया जाता है। इसमें एक व्यक्ति अपने खुद के विचारों, वास्तविक धारणा  एवं यादों पर सवाल उठाने लगता है और सामान्य तौर पर व्यक्ति के अंदर भ्रम, आत्मविश्वास की कमी, अनिश्चितता, भावनात्मक या मानसिक अस्थिरता देखने को मिलती हैं।

गैसलाइटिंग के सामान्य लक्षण

  • गैसलाइटिंग से पीड़ित व्यक्ति अक्सर यह बताते हैं कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जो उनके जीवन के बाकी हिस्सों से अलग होता है।
  • पीड़ित व्यक्ति के अंदर हमेशा आत्मविश्वास की कमी लिखी जाती है।
  • किसी से बातचीत करने के बाद व्यक्ति खुद को भ्रमित एवं कमजोर महसूस करता है।
  • गैसलाइटिंग से पीड़ित व्यक्ति चिंता, अवसाद, विकार, भटकाव, एवं आत्मसम्मान की कमी महसूस करता है।
  • गैसलाइटिंग के केस में किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को बार-बार मैनिपुलेट कर उसे कमजोर महसूस कराया जाता है।

गैसलाइटिंग का जेंडर प्रभाव

दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर अब्रामसन के अनुसार गैसलाइटिंग का कंसेप्ट किसी खास जेंडर से नहीं जुड़ा हुआ है हालांकि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को इसका अधिक सामना करना पड़ता है। यह हमारे सामाजिक सोच का एक हिस्सा है जहां महिलाओं को पुरुषों से कम आता जाता है। अधिकतर महिलाओं के आत्मविश्वास को शक की नजर से देखा जाता है और किसी के  कॉन्फिडेंस को डगमगाना ही गैसलाइटिंग का उद्देश्य होता है। गैसलाइटिंग का आखिरी चरण बहुत ही खतरनाक और डिप्रेशन वाला होता है जहां आदमी खुद पर विश्वास नहीं कर पाता और अपने आप को हीन नजर से देखता है।

गैसलाइटिंग का कैसे करें सामना।

किसी को कमजोर एवं आत्मविश्वास की कमी महसूस कराना ही गैसलाइटिंग का मुख्य उद्देश्य होता है। ऐसे में अगर कोई आपको बार-बार मैनिपुलेट कर रहा है और गलत साबित करने की कोशिश कर रहा है तो आप सावधान हो जाएं। सामने वाले के  फिजूल बातों पर ध्यान ना दें और अपनी काबिलियत के हिसाब से खुद को तैयार रखें और काम करें। बहुत से ऐसे लोग हैं जो खुद की सुपर मेसी दिखाने के लिए दूसरे के आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाते हैं।


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